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भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की तैयारी

ByParyavaran Vichar

Feb 9, 2026

देहरादून।
प्रदेश में भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार इनका मानदेय बढ़ाने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिए गए हैं।

प्रदेश में वर्तमान में 24 हजार भोजन माताएं कार्यरत हैं, जो पीएम पोषण योजना के तहत कार्य कर रही हैं। उन्हें अभी कुल तीन हजार रुपये मानदेय मिलता है, जिसमें 900 रुपये केंद्र सरकार, 100 रुपये राज्यांश और दो हजार रुपये राज्य सरकार अलग से देती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, भोजन माताओं के मानदेय में वृद्धि के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।

वहीं, प्रदेश में 40 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं, जो लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रही हैं। वर्तमान में इन्हें केंद्र सरकार की ओर से 4500 रुपये और राज्य सरकार की ओर से 4800 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। राज्य सरकार इनके मानदेय में वृद्धि पर विचार कर रही है।

मानदेय वृद्धि को लेकर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बंशीलाल राणा के अनुसार, विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय को लेकर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसमें अन्य राज्यों में मिलने वाले मानदेय का भी तुलनात्मक विवरण शामिल है।

इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में भी बढ़ोतरी की तैयारी है। प्रदेश में लगभग 12 हजार आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। अधिकारियों का कहना है कि आंगनबाड़ी, भोजन माताओं और आशा कार्यकर्ताओं—तीनों के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

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