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Paryavaran Vichar

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उत्तराखंड कांग्रेस में ‘चेहरे’ की लड़ाई तेज, जमीनी आधार कमजोर पड़ता हुआ

ByParyavaran Vichar

Apr 7, 2026

देहरादून: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में इन दिनों आंतरिक कलह खुलकर सामने आ रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी जहां सत्ता में वापसी के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं के बीच ‘पार्टी का चेहरा’ बनने की होड़ तेज हो गई है। इस खींचतान का असर पार्टी के जमीनी आधार पर भी पड़ता दिख रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस अब कैडर आधारित पार्टी नहीं रही, जिसके कारण अनुशासनहीनता और गुटबाजी बढ़ी है। राज्य में पिछले चुनावों—खासतौर पर 2017 के बाद—में लगातार हार ने संगठन को कमजोर किया है।

पार्टी हाईकमान ने गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और करण माहरा को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। वहीं, वरिष्ठ नेता हरीश रावत इन नेताओं को ‘पंचमुखी नेतृत्व’ बता चुके हैं और खुद कई बार सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की बात कह चुके हैं।

हालांकि, इसके बावजूद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस बना हुआ है। नेताओं के बीच आपसी बयानबाजी और गुटबाजी से यह साफ संकेत मिल रहा है कि चुनाव से पहले ही कांग्रेस आंतरिक संघर्ष से जूझ रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि पार्टी को 2027 में मजबूत वापसी करनी है, तो उसे आंतरिक विवादों को सुलझाकर जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना होगा।

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