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गंग नहर में बढ़ता प्रदूषण जलीय जीवों के लिए बना खतरा

ByParyavaran Vichar

May 15, 2026

हरिद्वार। आगामी कुंभ मेले को दिव्य और भव्य बनाने की तैयारियों के बीच गंग नहर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की हालिया जांच में खुलासा हुआ है कि गंदे नालों और सीवरेज के लगातार नहर में गिरने से जल की गुणवत्ता तेजी से खराब हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, गंग नहर के पानी में ऑक्सीजन का स्तर तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से भी कम रह गया है, जबकि जलीय जीवों के संरक्षण के लिए यह स्तर कम से कम पांच मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। ऑक्सीजन की कमी के कारण मछलियों, मेंढकों और अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

गंगा में गिर रहे गंदे नाले

जांच में पाया गया कि नीलधारा से नहर में पानी आने के बाद से ही प्रदूषण बढ़ रहा है। नए घाटों के निर्माण के दौरान कई स्थानों पर बड़े पाइपों के जरिए गंदगी सीधे गंगा में छोड़ी जा रही है। यहां तक कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की कॉलोनी से भी गंदा पानी पाइपों के माध्यम से गंगा में डाला जा रहा है।

गंग नहर की वार्षिक बंदी के दौरान भी गंदगी बहती हुई देखी गई। ज्वालापुर क्षेत्र के कस्साबान नाले सहित बहादराबाद से रुड़की तक 10 से अधिक गंदे नाले सीधे गंग नहर में गिर रहे हैं, जिससे पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।

सिडकुल की फैक्टरियों पर भी सवाल

सिंचाई विशेषज्ञों का कहना है कि हरिद्वार में सिडकुल स्थापित होने के बाद से प्रदूषण में लगातार वृद्धि हुई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कुछ फैक्टरियों का दूषित पानी भी नालों के जरिए गंग नहर में छोड़ा जा रहा है, जिससे जल की गुणवत्ता और अधिक खराब हो रही है।

कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल

सिंचाई विभाग ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पहले ही पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नगर निगम और स्थानीय निकायों पर भी लापरवाही के आरोप लगे हैं।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ अनुज बंसल ने कहा कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो गंगा की शुद्धता और जलीय पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। वहीं अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने कहा कि गंग नहर में गिरने वाले नालों की रिपोर्ट मांगी गई है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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