देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता और पूर्व भाजपा नेता राम शरण नौटियाल ने कांग्रेस में वापसी कर ली है। सोमवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य मौजूद रहे। भाजपा छोड़ने के बाद कांग्रेस में उनकी वापसी को उनकी राजनीतिक पारी का नया मोड़ माना जा रहा है।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में ग्रहण की सदस्यता
राम शरण नौटियाल ने सोमवार को दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में कांग्रेस का दामन थामा। पार्टी में उनकी वापसी के दौरान उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख नेता मौजूद रहे। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की उपस्थिति में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
राम शरण नौटियाल इससे पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने भाजपा का रुख किया था और पिछले विधानसभा चुनाव में चकराता सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। अब एक बार फिर कांग्रेस में लौटने के साथ उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
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भाजपा छोड़ते समय संगठन पर लगाए थे गंभीर आरोप
भाजपा से अलग होने के बाद राम शरण नौटियाल ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के संगठनात्मक कामकाज पर सवाल उठाए थे। उन्होंने संगठन में अनुशासनहीनता और सार्वजनिक मंचों पर अपमान को पार्टी छोड़ने की प्रमुख वजह बताया था।
नौटियाल का कहना था कि किसी भी समर्पित राजनीतिक कार्यकर्ता के लिए मान-सम्मान बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनके अनुसार, पार्टी में कई वरिष्ठ और कनिष्ठ नेताओं से उन्हें स्नेह मिला, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि संगठन में एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द फैसले लिए जा रहे थे और कार्यकर्ताओं की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा था। उनके इन बयानों के बाद भाजपा से उनके अलग होने का मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बना था।
बोले- निजी फायदे के लिए राजनीति में नहीं आया
भाजपा छोड़ने के कारणों पर अपनी बात रखते हुए राम शरण नौटियाल ने कहा था कि वह ठेके-पट्टे या किसी निजी लाभ के उद्देश्य से राजनीति में नहीं आए थे। उनका दावा था कि उन्होंने हमेशा अपने क्षेत्र की समस्याओं और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा था कि राजनीति में आने का उनका उद्देश्य जनता के मुद्दों को उठाना और क्षेत्र के विकास के लिए काम करना था। उनके मुताबिक, जब किसी समर्पित कार्यकर्ता को सार्वजनिक मंच पर सम्मान नहीं मिलता, तो उसके लिए संगठन में काम करना कठिन हो जाता है।
नौटियाल ने पार्टी के भीतर कामकाज की शैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वह भाजपा में कड़े अनुशासन की उम्मीद के साथ शामिल हुए थे, लेकिन उन्हें परिस्थितियां इसके विपरीत नजर आईं।
प्रधानमंत्री के आह्वानों का पालन करने का भी किया था जिक्र
राम शरण नौटियाल ने भाजपा छोड़ने के बाद अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वानों का उल्लेख भी किया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रत्येक आह्वान को गंभीरता से लेते हुए उसका पालन किया, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ लोगों के व्यवहार से वह असंतुष्ट थे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोग टिकट की मांग करते थे और दूसरी ओर उनके राजनीतिक इस्तेमाल की बात भी करते थे। इसके अलावा, उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं पर अनुसूचित जाति के एक मंत्री के खिलाफ अंदरूनी तौर पर विरोध प्रदर्शन और बयानबाजी करने का आरोप भी लगाया था।
ये सभी आरोप राम शरण नौटियाल ने भाजपा छोड़ते समय लगाए थे। इन बयानों के आधार पर पार्टी के भीतर उनके असंतोष की वजहों को समझा जा सकता है, हालांकि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
चकराता से भाजपा के टिकट पर लड़ा था चुनाव
राम शरण नौटियाल उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने चकराता सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। भाजपा से अलग होने के बाद उन्होंने संगठनात्मक परिस्थितियों को अपने फैसले की वजह बताया था।
अब कांग्रेस में उनकी वापसी से उनकी राजनीतिक यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दिल्ली में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के दौरान उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।
कांग्रेस में वापसी से उत्तराखंड की राजनीति में बढ़ी चर्चा
राम शरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी ऐसे समय हुई है, जब उत्तराखंड में राजनीतिक दलों की गतिविधियां लगातार चर्चा में रहती हैं। भाजपा छोड़ने के बाद उन्होंने जिस तरह संगठनात्मक अनुशासन, मान-सम्मान और कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए थे, उससे उनके राजनीतिक रुख को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
अब कांग्रेस में लौटने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी में उन्हें क्या भूमिका मिलती है और वह आगे उत्तराखंड की राजनीति में किस तरह सक्रिय रहते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि राम शरण नौटियाल ने कांग्रेस की सदस्यता लेकर अपनी राजनीतिक पारी को नई दिशा दी है। उनकी वापसी से जुड़ी आगे की गतिविधियों और पार्टी में उनकी भूमिका पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।

