देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव से पहले मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के लिए प्रदेशव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से इसकी रूपरेखा तैयार कर सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अभियान की शुरुआत 16 नवंबर से होगी। इसके तहत प्रदेश की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में जिला मुख्यालयों से लेकर दूरस्थ गांवों और कस्बों तक मतदाताओं को ईवीएम के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
निर्वाचन आयोग की योजना के अनुसार, 16 नवंबर से 15 दिसंबर तक विशेष जागरूकता अभियान संचालित किया जाएगा। इसके लिए मोबाइल डिमॉन्स्ट्रेशन वैन (एमडीवी) का इस्तेमाल किया जाएगा। ये वैन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर लोगों को ईवीएम के माध्यम से मतदान करने की प्रक्रिया समझाएंगी। इसका उद्देश्य मतदाताओं को मतदान से पहले मशीन की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव देना और मतदान प्रक्रिया को लेकर उनकी जानकारी बढ़ाना है।
16 नवंबर से जिला मुख्यालयों पर खुलेंगे ईवीएम डिमॉन्स्ट्रेशन सेंटर
मतदाताओं को जागरूक करने के लिए प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन कार्यालयों में 16 नवंबर से ईवीएम डिमॉन्स्ट्रेशन सेंटर (ईडीसी) शुरू किए जाएंगे। इन केंद्रों पर पहुंचकर मतदाता ईवीएम की कार्यप्रणाली को समझ सकेंगे। उन्हें बताया जाएगा कि मतदान के दौरान बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट मशीन किस तरह काम करती हैं।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
इसके साथ ही मोबाइल डिमॉन्स्ट्रेशन वैन के माध्यम से उन क्षेत्रों तक भी पहुंचने की योजना बनाई गई है, जहां जिला मुख्यालयों तक पहुंचना मतदाताओं के लिए आसान नहीं होता। पहाड़ी और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों को अभियान में विशेष रूप से शामिल किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सभी जिलों को अभियान के संचालन के लिए निर्देश दिए हैं। जिला निर्वाचन कार्यालयों को स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम की व्यवस्था करने और अधिक से अधिक मतदाताओं तक जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रदेश में 12,543 पोलिंग स्टेशन, उपलब्ध हैं हजारों ईवीएम मशीनें
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के 13 जिलों में कुल 12,543 पोलिंग स्टेशन हैं। इन मतदान केंद्रों के लिए बड़ी संख्या में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 27,700 बैलेट यूनिट, 36,553 कंट्रोल यूनिट और 25,697 वीवीपैट मशीनें उपलब्ध हैं। चुनाव के दौरान इन मशीनों का उपयोग मतदान प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए किया जाएगा।
आयोग की ओर से उपलब्ध मशीनों के साथ-साथ अन्य चुनावी संसाधनों की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि मतदान के समय किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
चुनाव के लिए 1.90 लाख से अधिक कर्मचारी उपलब्ध
विधानसभा चुनाव के संचालन के लिए जनशक्ति की व्यवस्था भी लगभग पूरी कर ली गई है। निर्वाचन आयोग के अनुमान के मुताबिक, चुनाव संपन्न कराने के लिए करीब 1,08,400 कार्मिकों की आवश्यकता होगी।
इसके मुकाबले राज्य सरकार, केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को मिलाकर 1.90 लाख से अधिक कर्मचारी उपलब्ध हैं। ऐसे में चुनाव ड्यूटी के लिए आवश्यक मानव संसाधन जुटाने की दिशा में पर्याप्त व्यवस्था बताई जा रही है।
मतदान केंद्रों पर कर्मचारियों की तैनाती, मतदान दलों का गठन और विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए भी तैयारियां की जा रही हैं।
मतदान दलों के लिए 13 हजार से अधिक वाहनों की व्यवस्था
चुनाव के दौरान मतदान दलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के आवागमन के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की जा रही है। आयोग के अनुसार, चुनावी कार्यों के लिए 3,319 बसों, 310 ट्रकों और 9,669 हल्के वाहनों की आवश्यकता होगी।
इन वाहनों के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सूची तैयार कर ली गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों तक मतदान सामग्री और कर्मचारियों को पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस महीने उत्तराखंड आएगी चुनाव आयोग की टीम
विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के लिए निर्वाचन आयोग की एक टीम इसी महीने उत्तराखंड का दौरा कर सकती है। पिछले महीने भी आयोग की एक टीम प्रदेश का दौरा कर चुकी है। अब प्रस्तावित दौरे में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के साथ जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया जाएगा।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने बताया कि आयोग की टीम के दौरे की तिथि अभी निर्धारित नहीं हुई है। टीम प्रदेश में पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठक करेगी और विभिन्न जिलों में चुनावी तैयारियों की जानकारी लेगी।
इसके अलावा टीम मतदान केंद्रों पर जाकर वहां उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं का भी जायजा लेगी। इसमें बूथों की स्थिति, आवश्यक संसाधन और मतदान प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने की तैयारियों की समीक्षा शामिल होगी।
दूरस्थ गांवों तक पहुंचाने की तैयारी, मतदान से पहले बढ़ेगी जागरूकता
निर्वाचन आयोग का पूरा जोर इस बार चुनाव से पहले मतदाताओं को जागरूक करने पर है। ईवीएम डिमॉन्स्ट्रेशन सेंटर और मोबाइल वैन के माध्यम से शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में भी अभियान चलाया जाएगा।
16 नवंबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। आयोग की कोशिश है कि मतदाता मतदान से पहले ईवीएम की प्रक्रिया को अच्छी तरह समझ सकें और मतदान के दिन बिना किसी भ्रम के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
कुल मिलाकर उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने मशीनों, कर्मचारियों, वाहनों और मतदाता जागरूकता जैसे सभी प्रमुख पहलुओं पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। अब इस महीने प्रस्तावित आयोग की टीम के दौरे और ईवीएम जागरूकता अभियान के शुरू होने के साथ चुनावी तैयारियों को और गति मिलने की उम्मीद है।

