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हिमाचल में 749 टीजीटी शिक्षकों की पदोन्नति वरिष्ठता विवाद में अटकी, 25 साल से तरक्की का इंतजार कर रहे प्रवक्ता

ByParyavaran Vichar

Nov 4, 2026

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से विवादों में उलझा हुआ है। प्रदेश के 749 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) प्रवक्ता पद पर पदोन्नति मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन वरिष्ठता से जुड़े कानूनी विवाद के चलते विभाग पदोन्नति आदेश जारी नहीं कर पा रहा है। हैरानी की बात यह है कि पदोन्नति पैनल तैयार होने और विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया पूरी हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है। इसके बावजूद शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया है।

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वहीं, प्रदेश के स्कूल प्रवक्ता भी पिछले करीब 25 वर्षों से पदोन्नति की राह देख रहे हैं। लंबे समय तक विभाग में सेवाएं देने के बावजूद कई शिक्षक बिना किसी पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे शिक्षकों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। दूसरी ओर, प्रदेश के स्कूलों में प्रवक्ताओं के 3,595 पद रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद शिक्षा निदेशालय ने इस वर्ष पदोन्नति के लिए नए मामले मंगवाने से भी इन्कार कर दिया है।

डीपीसी पूरी, फिर भी 749 शिक्षकों को नहीं मिला पदोन्नति का लाभ

जानकारी के अनुसार, टीजीटी से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। पदोन्नति पैनल तैयार होने के साथ डीपीसी की बैठक भी हो चुकी है। इसके बावजूद वरिष्ठता विवाद के कारण अंतिम आदेश जारी नहीं किए गए हैं।

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बताया जा रहा है कि टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नति पर सीधे तौर पर किसी न्यायालय की रोक नहीं है, लेकिन डीम्ड रेगुलर और सामान्य नियमित शिक्षकों की वरिष्ठता से जुड़े मामले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसी कानूनी उलझन के कारण विभाग पदोन्नति के मामले में आगे बढ़ने से बच रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि जब पदोन्नति की विभागीय प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और प्रवक्ताओं के हजारों पद खाली हैं, तो 749 पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ देने में देरी क्यों की जा रही है।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों से बढ़ी उलझन

टीजीटी शिक्षकों की पदोन्नति का मामला वरिष्ठता से जुड़े न्यायिक विवादों के कारण प्रभावित हुआ है। अनिल कुमार बनाम हिमाचल सरकार मामले में पिछले वर्ष अक्तूबर में हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश जारी किया था।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश राज्य बनाम सतीश कुमार एवं अन्य मामले में 7 अक्तूबर 2025 को राज्य सरकार की अपील स्वीकार की थी। इसके साथ ही पूर्णिमा बनाम सरकार मामले में हाईकोर्ट की अवमानना कार्यवाही पर रोक लगा दी गई थी।

इन मामलों के चलते प्रदेश में शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारित करने का मुद्दा और जटिल हो गया है। विभाग को यह तय करने में परेशानी हो रही है कि किन शिक्षकों को किस आधार पर वरिष्ठता का लाभ दिया जाए और पदोन्नति प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।

पहले पदोन्नत 642 शिक्षकों पर भी पड़ा विवाद का असर

वरिष्ठता विवाद का प्रभाव केवल नई पदोन्नतियों पर ही नहीं, बल्कि पहले जारी किए गए पदोन्नति आदेशों पर भी पड़ा है। शिक्षा विभाग ने 21 अगस्त 2025 को प्रदेश के 642 टीजीटी शिक्षकों को प्रवक्ता पद पर पदोन्नत किया था।

हालांकि, इसके कुछ समय बाद ही इन पदोन्नतियों को लेकर विवाद सामने आने लगा। नवंबर 2025 में इनमें से 592 शिक्षकों को पदावनति के नोटिस जारी कर दिए गए। इससे पदोन्नत शिक्षकों के बीच भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई।

इसके अलावा अगस्त 2025 में पदोन्नत हुए सैकड़ों शिक्षकों का वेतन निर्धारण और वार्षिक वेतनवृद्धि का मामला भी लंबित है। जिन शिक्षकों को पदोन्नति मिली थी, उन्हें अब तक इसका पूरा वित्तीय लाभ नहीं मिल पाया है।

सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन भी प्रभावित

वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े विवाद का असर सेवानिवृत्त शिक्षकों पर भी पड़ रहा है। पदोन्नति और वेतन निर्धारण की प्रक्रिया लंबित होने के कारण कई सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन का निर्धारण प्रभावित हुआ है।

शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक सेवाएं देने के बाद भी उन्हें पदोन्नति और उससे जुड़े वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं, कुछ शिक्षक बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में विभागीय विवाद का असर कर्मचारियों के सेवा लाभों पर भी दिखाई दे रहा है।

वरिष्ठता सूची में फिर हो सकता है बदलाव

प्रदेश में कर्मचारियों की वरिष्ठता निर्धारित करने को लेकर एक और प्रक्रिया प्रस्तावित है। कर्मचारी अधिनियम निरस्त होने के बाद ताज मोहम्मद मामले में आए निर्णय के आधार पर अनुबंध शिक्षकों को उनकी नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता देने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि अगले महीने वरिष्ठता सूचियों में बदलाव की तैयारी है। यदि ऐसा होता है तो पहले से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया और अधिक उलझ सकती है। वरिष्ठता सूची में बदलाव होने से पदोन्नति के लिए पात्र शिक्षकों की स्थिति पर भी असर पड़ने की संभावना है।

महाधिवक्ता से मिला शिक्षक संघ, इसी सत्र में पदोन्नति की मांग

टीजीटी शिक्षकों की पदोन्नति का मामला अब शिक्षक संगठनों ने भी प्रमुखता से उठाना शुरू कर दिया है। राजकीय टीजीटी कला संघ के प्रदेश महासचिव विजय हीर के अनुसार, संघ ने इस मुद्दे को शिक्षा विभाग के समक्ष उठाने के साथ ही प्रदेश के महाधिवक्ता अनूप रत्न से भी मुलाकात की है।

संघ की मांग है कि पदोन्नति से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि 749 शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता निकाला जा सके। संघ ने सरकार और विभाग से इसी शैक्षणिक सत्र में पदोन्नति आदेश जारी करने की मांग की है।

3,595 पद खाली, फिर भी पदोन्नति का इंतजार

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रवक्ताओं के 3,595 पद रिक्त होने के बावजूद पदोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाना शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। एक ओर विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की जरूरत बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर पात्र टीजीटी शिक्षक पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

शिक्षक संगठनों का मानना है कि वरिष्ठता विवाद का जल्द समाधान निकालकर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। इससे न केवल शिक्षकों को लंबे समय से लंबित सेवा लाभ मिल सकेंगे, बल्कि सरकारी स्कूलों में प्रवक्ताओं की कमी दूर करने में भी मदद मिलेगी।

फिलहाल, 749 टीजीटी शिक्षकों की पदोन्नति का मामला कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच अटका हुआ है। अब सबकी निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं कि वरिष्ठता विवाद का समाधान निकालकर शिक्षकों को कब तक पदोन्नति का लाभ दिया जाता है।

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