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उत्तराखंड में तबादला एक्ट की अनदेखी, कई विभागों में नियमों को दरकिनार कर हुए तबादले

ByParyavaran Vichar

Jul 3, 2026

देहरादून। उत्तराखंड में कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए तबादला एक्ट के बावजूद कई विभागों में नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं। स्वास्थ्य, खेल, सिंचाई, आयुर्वेदिक और शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर कर्मचारियों और संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

स्वास्थ्य विभाग पर नियमों की अनदेखी के आरोप

स्वास्थ्य विभाग में कुछ चिकित्सकों के तबादलों में मानवीय आधार पर दी गई छूट का पालन नहीं किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि दिव्यांग बच्चों के अभिभावक और गंभीर रूप से बीमार चिकित्सकों का भी दुर्गम क्षेत्रों में तबादला कर दिया गया। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ का दावा है कि 40 से 50 चिकित्सकों के तबादलों में तबादला एक्ट के प्रावधानों की अनदेखी हुई है।

खेल विभाग में भी उठे सवाल

खेल विभाग में ऐसे अधिकारियों का भी सुगम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में तबादला कर दिया गया, जिन्हें नियमानुसार दुर्गम क्षेत्र में भेजा जाना चाहिए था। पात्रता सूची के अनुसार कई अधिकारियों की लंबे समय तक सुगम क्षेत्रों में सेवा पूरी होने के बावजूद उनका अनिवार्य दुर्गम तबादला नहीं किया गया।

सिंचाई विभाग में मनमाने तबादलों का आरोप

उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के अनुसार सिंचाई विभाग में ऐसे सहायक अभियंताओं का तबादला किया गया जो पात्रता सूची में शामिल ही नहीं थे। साथ ही कई अधिकारियों को उनके द्वारा दिए गए विकल्पों की अनदेखी कर अन्य स्थानों पर भेज दिया गया।

आयुर्वेदिक विभाग में समय पर नहीं हो सके तबादले

आयुर्वेदिक विभाग में तबादला समिति निर्धारित समय के भीतर प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं कर सकी। शासन द्वारा अतिरिक्त 20 दिन का समय दिए जाने के बावजूद विभाग 30 जून तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया।

शिक्षा विभाग ने मांगा अतिरिक्त समय

तबादला एक्ट के अनुसार 10 जून तक तबादले पूरे हो जाने चाहिए थे, लेकिन शिक्षा विभाग समय सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। विभाग ने शासन से अतिरिक्त समय की मांग की है, जिस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने बताया कि तबादलों के लिए अतिरिक्त समय देने का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजा गया है, लेकिन अभी इस पर स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।

प्रदेश में विभिन्न विभागों में तबादलों को लेकर उठे इन सवालों के बाद तबादला प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर फिर से बहस तेज हो गई है।

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