कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यमुना की प्रतिमा का अनावरण किया और हरिघाट का लोकार्पण किया। इसके साथ ही मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से करीब 7.52 करोड़ रुपये की लागत से विकसित स्नान घाट जनता को समर्पित किया गया। यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी किया गया।
170 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा घाट
यमुना नदी के दायीं ओर विकसित यह स्नान घाट 170 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है। परियोजना में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और तट के सौंदर्यीकरण को ध्यान में रखा गया है।
घाट पर नदी की ओर 170 मीटर लंबी और पांच मीटर ऊंची दो आरसीसी सुरक्षा दीवारें बनाई गई हैं। करीब 2000 वर्गमीटर क्षेत्र में आरसीसी और रेड सैंड स्टोन से दो प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। नदी तक सुरक्षित पहुंच के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया गया है। यमुना आरती के लिए चार आरसीसी आरती स्थल भी बनाए गए हैं।
सोलर लाइट और सुरक्षा की सुविधाएं
घाट पर रात के समय प्रकाश व्यवस्था के लिए 25 सोलर लाइटें लगाई गई हैं। सौंदर्यीकरण के लिए प्लांटर्स और आगंतुकों के बैठने के लिए शेड के साथ 12 बेंच स्थापित की गई हैं।
महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए शौचालय और चेंजिंग रूम का नवीनीकरण किया गया है। पेयजल के लिए वाटर स्पाउट की व्यवस्था की गई है। नदी किनारे सुरक्षा के लिए करीब 300 मीटर लंबी एसएस रेलिंग और एसएस चेन लगाई गई है।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का क्षेत्र
हरिपुर कालसी देहरादून-चकराता राष्ट्रीय राजमार्ग-507 पर देहरादून से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित है और जौनसार-भाबर क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। क्षेत्र का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। इसके आसपास अशोक शिलालेख, देवस्थल मंदिर और अश्वमेघ यज्ञ स्थल जैसे महत्वपूर्ण स्थान मौजूद हैं।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया के अनुसार, हरिपुर कालसी का यमुना तट लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। यहां पहले साप्ताहिक यमुना आरती होती थी। नए घाट के निर्माण के बाद अब प्रतिदिन आरती के आयोजन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं।
पर्यटन को भी मिल सकता है बढ़ावा
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, नए घाट से यमुना तट को व्यवस्थित स्वरूप मिला है। स्नान, आरती, बैठने, पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलने से श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों को भी सुविधा होगी।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले हरिपुर कालसी में बेहतर आधारभूत ढांचा स्थानीय पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को विस्तार देने में सहायक हो सकता है।
