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करौली शंकर महाराज ने राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को किया सम्मानित

ByParyavaran Vichar

Nov 7, 2025

हरिद्वार। मिश्री मठ में आयोजित पंचदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव के तीसरे दिन संत समागम का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें करौली शंकर महाराज ने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को सम्मानित किया। उत्तराखंड की रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में देहरादून, ऋषिकेश, रायवाला, हरिपुर और हरिद्वार क्षेत्र के अनेक आंदोलनकारियों को अंगवस्त्र और उपहार प्रदान किए गए।

इस अवसर पर करौली शंकर महादेव महाराज ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है, जिसकी स्थापना सैकड़ों आंदोलनकारियों के बलिदान और संघर्ष के परिणामस्वरूप संभव हुई। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम उन शहीद हुतात्माओं को नमन करें और उन सभी आंदोलनकारियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करें, जिनकी अटूट निष्ठा और अदम्य साहस से उत्तराखंड का निर्माण हुआ।

महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने इस अवसर पर कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन में मातृशक्ति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि महिला आंदोलनकारियों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि उत्तराखंड के सामाजिक ताने-बाने में महिलाओं की भूमिका सदा से सशक्त रही है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने करौली शंकर महादेव के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हरिद्वार की पवित्र भूमि से यह संदेश दिया है कि राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान सर्वोच्च होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का यह रजत जयंती वर्ष आंदोलनकारियों के त्याग, समर्पण और संघर्ष को याद करने का अवसर है।

सम्मान समारोह में हरिद्वार से योगेश पांडे, सतीश जोशी, आशु बर्थवाल सहित रायवाला, ऋषिकेश, छिदरवाला और हरिपुर क्षेत्रों से आए सैकड़ों आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया।

संत समागम के दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि तंत्र, मंत्र, ध्यान और योग साधना से जीवन को सार्थक दिशा मिलती है। कार्यक्रम में स्वामी चक्रपाणि महाराज (भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष), श्रीमहंत देवानंद सरस्वती महाराज (जूना अखाड़ा के पूर्व सचिव), श्रीमहंत दुर्गादास महाराज (वैष्णव अखाड़ा), बाबा बलराम दास हठयोगी और श्रीमहंत देवानंद सरस्वती ने भी अपने विचार रखे और उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

 

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