• Sat. Jan 31st, 2026

Paryavaran Vichar

Hindi News Portal

सिस्टम का स्टेयरिंग फेल: हादसों से सबक लिया होता तो बच सकती थीं सात जानें, इस साल सड़कों पर 950 मौतें

ByParyavaran Vichar

Dec 31, 2025

अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण में मंगलवार सुबह हुआ भीषण बस हादसा एक बार फिर सिस्टम की गंभीर विफलता को उजागर करता है। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है, जब बड़े-बड़े सड़क हादसों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र से कोई ठोस सबक नहीं लिया जा रहा है। दुर्घटना में जीवित बचे यात्रियों के अनुसार, बस का स्टेयरिंग अचानक फेल हो गया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। यदि समय रहते वाहनों की फिटनेस, सड़कों की स्थिति और सुरक्षा मानकों पर गंभीरता दिखाई गई होती, तो इस हादसे में गईं सात जानें शायद बचाई जा सकती थीं।

प्रदेश में खस्ताहाल बसें, पहाड़ी सड़कों पर मौजूद डेंजर प्वाइंट और कमजोर निगरानी व्यवस्था हर साल सैकड़ों लोगों की जान ले रही है। वर्ष 2025 में अब तक उत्तराखंड की सड़कों पर करीब 950 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 1600 के पार पहुंच गई है। ये आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक चिंताजनक हैं।

उत्तराखंड पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में प्रदेश में 1311 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जो 2025 में बढ़कर 1369 हो गई हैं। हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या भी 2024 में 770 से बढ़कर 2025 में 917 तक पहुंच गई है। घायलों की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 1145 से बढ़कर लगभग 1600 हो चुकी है। पुलिस और यातायात विभाग द्वारा चलाए जा रहे चेकिंग अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद दुर्घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

वाहनों की फिटनेस की अनदेखी बड़ा कारण
विशेषज्ञों और विभागीय रिपोर्टों के मुताबिक, वाहनों की फिटनेस की अनदेखी सड़क हादसों का एक बड़ा कारण बन रही है। इसके साथ ही ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, यातायात नियमों की अवहेलना और गलत तरीके से ड्राइविंग करना भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है। इन लापरवाहियों की कीमत अक्सर निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

सुप्रीम सख्ती भी बेअसर
भिकियासैंण बस हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा आम लोग भुगतते रहेंगे। बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त रुख अपना चुका है और संबंधित विभागों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव ने भी ओवरस्पीड और रेड लाइट जंप करने वालों के लाइसेंस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी नहीं बदल पा रहे हैं।

इन जिलों में हालात चिंताजनक
अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, नैनीताल, पिथौरागढ़, पौड़ी और रुद्रप्रयाग जिलों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, टिहरी और देहरादून में हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी, अल्मोड़ा, चमोली, टिहरी, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में घायलों की संख्या भी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक दर्ज की गई है।

By Paryavaran Vichar

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून से प्रकाशित हिंदी समाचार पोर्टल पर्यावरण विचार एक ऐसा माध्यम है, जो हिंदी भाषा में लोगों को ताज़ा और महत्वपूर्ण समाचार प्रदान करता है। हिंदी समाचार पोर्टल पर्यावरण विचार द्वारा लोग उत्तराखण्ड के साथ-साथ फीचर, खेल, मनोरंजन, राजनीतिक, आलेख और राष्ट्रीय समाचारआदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *