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विष्णुगाड परियोजना में पहले भी हो चुका है बड़ा हादसा, ग्लेशियर फटने से कई मजदूर हुए थे लापता

ByParyavaran Vichar

Dec 31, 2025

चमोली जिले की विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की सुरंग में देर रात हुए हादसे ने एक बार फिर पुराने दर्दनाक हादसों की याद दिला दी है। यह पहली बार नहीं है जब इस परियोजना से जुड़ा कोई गंभीर हादसा सामने आया हो। इससे पहले भी यहां बड़ा हादसा हो चुका है, जिसमें कई मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

सात फरवरी 2021 को चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से ऋषिगंगा नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा का सबसे ज्यादा असर तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना पर पड़ा था। बाढ़ के कारण परियोजना की सुरंग में भारी मात्रा में पानी और मलबा भर गया था, जिससे वहां काम कर रहे कई मजदूर लापता हो गए थे। इस हादसे में 100 से अधिक मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई थी।

प्रमुख सुरंग हादसे:

  • पिथौरागढ़ टनल हादसा (अगस्त 2025): भूस्खलन के कारण एनएचपीसी पावर हाउस की सुरंग का मुहाना बंद हो गया था, जिससे अंदर काम कर रहे 19 मजदूर फंस गए थे।

  • सिलक्यारा टनल हादसा (नवंबर 2023): उत्तरकाशी की सिलक्यारा-डंडालगांव सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था। इसमें 41 मजदूर फंस गए थे, जिन्हें 17 दिनों के लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • तपोवन-विष्णुगाड हादसा (फरवरी 2021): ऋषिगंगा त्रासदी के दौरान एनटीपीसी के हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में बाढ़ और मलबा भरने से 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

ताजा हादसे का घटनाक्रम:
जानकारी के अनुसार, मंगलवार देर रात विष्णुगाड परियोजना की सुरंग के भीतर मजदूरों को लाने-ले जाने वाली दो लोको ट्रेनों की आपस में टक्कर हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब 60 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें से 42 घायलों का इलाज जिला अस्पताल गोपेश्वर में और 17 मजदूरों का उपचार विवेकानंद अस्पताल पीपलकोटी में किया जा रहा है। अन्य घायलों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। फिलहाल सभी घायलों की हालत स्थिर है।

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