स्याल्दे के चचरोटी-स्याल्दे-भाकूड़ा मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लंबे समय से सड़क पर गहरे गड्ढे और उखड़ा डामर लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। हालात तब और बिगड़ गए जब विभाग ने सड़क की मरम्मत के बजाय गड्ढों में विनोद नदी की रेत भरनी शुरू कर दी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब पांच साल पहले सड़क का डामरीकरण हुआ था, लेकिन अब सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है और दोबारा डामरीकरण की जरूरत है। यह मार्ग बाजार, तहसील, विकासखंड और 12 से अधिक सरकारी कार्यालयों को जोड़ता है, जिससे यहां वाहनों की आवाजाही काफी अधिक रहती है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क के गड्ढों में रेत डालने से दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। उनका कहना है कि अस्थायी मरम्मत के लिए पत्थर और मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन नदी की रेत डालना विभाग की लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने बताया कि सड़क सुधार की मांग कई बार विभाग के सामने उठाई गई, लेकिन हर बार बजट की कमी का हवाला देकर मामला टाल दिया गया। इस मुद्दे पर कई ग्रामीणों और व्यापारियों ने नाराजगी जताई।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर चेतन रावल ने कहा कि ग्रामीण सड़कों के लिए फिलहाल बजट उपलब्ध नहीं है। पेंच भरान के लिए भी धनराशि नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि ठेकेदार द्वारा गड्ढों को समतल करने का काम फिलहाल रोक दिया गया है और बजट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
