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उत्तराखंड: पांच साल बाद भी राजकीय हाईस्कूलों के प्रधानाध्यापकों का स्थायीकरण नहीं, पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित

ByParyavaran Vichar

Aug 5, 2026

देहरादून: उत्तराखंड के राजकीय हाईस्कूलों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों का पिछले पांच वर्षों से स्थायीकरण नहीं हो सका है, जिसके कारण उनकी पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। शिक्षा निदेशालय ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से प्रधानाध्यापकों के स्थायीकरण संबंधी प्रस्ताव मांगे हैं।

शिक्षा विभाग में वर्ष 2018 के बाद से शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की पदोन्नतियां लंबे समय से लंबित हैं। इसके चलते कई शिक्षक 30 से 35 वर्षों की सेवा पूरी करने के बाद भी एक ही पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विभाग में अब पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन स्थायीकरण की शर्त के कारण इसे फिर से टाल दिया गया है।

वर्तमान में विभाग में प्रधानाध्यापकों के लगभग 93 प्रतिशत और प्रधानाचार्यों के 90 प्रतिशत पद रिक्त बताए जा रहे हैं। राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री रमेश पैन्यूली का कहना है कि अधिकांश प्रधानाध्यापकों की विभाग में 35 वर्ष की सेवा पूरी हो चुकी है। उनका तर्क है कि जब वे प्रवक्ता पद पर रहते हुए पहले ही स्थायी हो चुके हैं, तो प्रधानाध्यापक बनने के बाद दोबारा स्थायीकरण की प्रक्रिया का कोई औचित्य नहीं है। उनका कहना है कि यदि यह प्रक्रिया आवश्यक थी, तो प्रोबेशन अवधि समाप्त होते ही पूरी कर ली जानी चाहिए थी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में करीब 350 शिक्षकों को पदोन्नति देकर प्रधानाध्यापक बनाया गया था, जिनमें से अधिकांश अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

वहीं, शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक (एलटी) से प्रवक्ता के करीब 3,500 पदों पर पदोन्नति भी वर्ष 2018 से लंबित है। शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति में देरी के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

एससी, एसटी एवं ओबीसी वैचारिक महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष आर.एल. आर्य ने आशंका जताई है कि तैयार की जा रही पदोन्नति सूची से आरक्षित वर्ग के कई प्रवक्ताओं की वरिष्ठता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इस मुद्दे पर शिक्षा सचिव से मिलने की बात कही है।

इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद सिमल्टी ने कहा कि प्रत्येक पद के लिए स्थायीकरण की प्रक्रिया अलग होती है और नियमानुसार प्रधानाध्यापकों का स्थायीकरण कराया जा रहा है।

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