• Sat. Sep 19th, 2026

Paryavaran Vichar

Hindi News Portal

आईआईटी रुड़की में अजीत डोभाल ने सुनाया शुरुआती करियर का अनुभव, बोले- लगा था करियर खत्म हो गया

ByParyavaran Vichar

Sep 19, 2026

रुड़की। आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने अपने शुरुआती करियर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि युवा आईपीएस अधिकारी के तौर पर सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभालते हुए एक मिशन के दौरान ऐसी स्थिति पैदा हो गई थी, जब उन्हें लगा कि उनका करियर समाप्त हो गया है। हालांकि, जांच के बाद उन्हें मामले में दोषी नहीं पाया गया और यह घटना उनके करियर का अंत नहीं, बल्कि एक कठिन अनुभव साबित हुई।

डोभाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि उस समय वह करीब 20 वर्ष की उम्र में थे और इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नए थे। उन्हें सिक्किम में खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस दौर में सिक्किम भारत में शामिल होने की प्रक्रिया से गुजर रहा था। उनकी जिम्मेदारियों में सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी के साथ-साथ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की गतिविधियों से संबंधित सूचनाएं जुटाना भी शामिल था।

इसी दौरान सीमा क्षेत्र में एक इंटेलिजेंस मिशन के लिए टीम भेजी गई। टीम को कुछ दिनों में वापस लौटना था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी उसकी कोई जानकारी नहीं मिली। पांच दिन, फिर दस दिन और इसके बाद करीब 15 दिन गुजर गए, लेकिन टीम वापस नहीं लौटी। डोभाल ने बताया कि यह स्थिति उनके लिए पेशेवर चिंता के साथ-साथ मानवीय स्तर पर भी बेहद परेशान करने वाली थी। उन्हें यह तक पता नहीं था कि मिशन पर गए लोग सुरक्षित हैं या नहीं। किसी हिमस्खलन या अन्य प्राकृतिक आपदा की भी कोई सूचना नहीं थी।

चीनी हिरासत में थी मिशन पर गई टीम

इसी बीच मुख्यालय से उन्हें फोन आया। वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा पार भेजा था। डोभाल ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि टीम लौट आएगी, क्योंकि उसे कुछ ही दिनों में वापस आ जाना चाहिए था। लेकिन तब तक करीब 10-11 दिन बीत चुके थे।

बाद में उन्हें जानकारी मिली कि मिशन पर गए लोग चीनी हिरासत में हैं। चीनी सैनिकों ने उन्हें पकड़कर पूछताछ की थी। बातचीत के बाद उन्हें वापस लौटा दिया गया। जब टीम वापस आई तो उसकी हालत बेहद खराब थी।

जांच में सामने आई नक्शे और स्केच की खामियां

इस घटना के बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई। डोभाल ने छात्रों को बताया कि उस समय उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो गया है। वह अभी अपने करियर की शुरुआत में ही थे और उन्हें लगा कि अब उन्हें अपने लिए कोई दूसरा रास्ता तलाशना पड़ेगा।

हालांकि, जांच पूरी होने के बाद उन्हें इस मामले में दोषी नहीं पाया गया। जांच में सामने आया कि मुख्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में कुछ खामियां और गलतियां थीं। इन्हीं गलतियों की वजह से मिशन के दौरान यह स्थिति पैदा हुई थी।

मुश्किल दौर को करियर का अंत न मानें

अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए डोभाल ने छात्रों को संदेश दिया कि करियर में आने वाली किसी कठिन घटना को अंतिम पड़ाव नहीं मानना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि जिस घटना को उन्होंने कभी अपने करियर का अंत समझ लिया था, वह उनके जीवन की आगे की यात्रा को रोक नहीं सकी।

उन्होंने छात्रों को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और असफलता या चुनौती को जीवन का अंतिम सत्य न मानने की सीख दी।

By Paryavaran Vichar

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून से प्रकाशित हिंदी समाचार पोर्टल पर्यावरण विचार एक ऐसा माध्यम है, जो हिंदी भाषा में लोगों को ताज़ा और महत्वपूर्ण समाचार प्रदान करता है। हिंदी समाचार पोर्टल पर्यावरण विचार द्वारा लोग उत्तराखण्ड के साथ-साथ फीचर, खेल, मनोरंजन, राजनीतिक, आलेख और राष्ट्रीय समाचारआदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *