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उत्तराखंड कांग्रेस में सियासी हलचल: अपनों के साथ यात्रा पर निकले हरीश रावत, 7 अक्टूबर को दिल्ली में सैलजा-वेणुगोपाल से मुलाकात

ByParyavaran Vichar

Oct 6, 2026

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की सियासत में इन दिनों हलचल तेज है। पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच रावत ने कुमाऊं क्षेत्र में अपना सफर जारी रखा। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा की चिट्ठी के बावजूद हरीश रावत सोमवार को जसपुर से धन्यवाद जनसंवाद यात्रा पर निकले। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विधायक, पूर्व विधायक और उनके समर्थक उनके साथ नजर आए।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

हरीश रावत की यात्रा में नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। हालांकि, यात्रा के दौरान हरीश रावत ने प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की चिट्ठी पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने पार्टी में गुटबाजी या बगावत की बात को भी स्वीकार नहीं किया।

जसपुर से शुरू हुआ सफर, हल्द्वानी में हुआ समापन

हरीश रावत ने सोमवार को जसपुर से अपनी धन्यवाद जनसंवाद यात्रा शुरू की। यात्रा का मार्ग काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी तक रहा। रास्ते में कई स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। कई जगह फूल-मालाओं और आतिशबाजी के साथ उनका अभिनंदन किया गया।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

यात्रा के दौरान हरीश रावत के साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नजर आए। इनमें विधायक प्रीतम सिंह, तिलक राज बेहड़, हरीश धामी, मनोज तिवारी और आदेश चौहान सहित अन्य नेता शामिल रहे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण और हिमेश खर्कवाल के अलावा पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा भी उनके साथ दिखाई दिए।

नेताओं और समर्थकों की इस मौजूदगी को उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

सैलजा की चिट्ठी का यात्रा पर नहीं दिखा असर

हरीश रावत की यात्रा को लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा की ओर से चिट्ठी सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। माना जा रहा था कि इसका असर रावत की प्रस्तावित यात्रा पर पड़ सकता है, लेकिन सोमवार को जसपुर से यात्रा शुरू होने के बाद ऐसा नहीं दिखा।

रावत के साथ उनके करीबी माने जाने वाले कई नेता और समर्थक यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान हरीश रावत ने हालांकि सैलजा की चिट्ठी को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

मीडिया के सवालों पर भी उन्होंने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने यात्रा को व्यक्तिगत जनसंवाद और लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

‘यात्रा को पार्टी का कार्यक्रम नहीं बनाया’

हरीश रावत ने कहा कि उनके हाथ में यात्रा के दौरान तिरंगा जरूर है, लेकिन उन्होंने इसे कांग्रेस का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बनाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के लोग अपनी इच्छा से यात्रा में शामिल हो रहे हैं।

रावत के इस बयान को पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां कांग्रेस के कई नेता उनके साथ दिखाई दे रहे हैं, वहीं पार्टी नेतृत्व की ओर से व्यक्तिगत स्तर पर होने वाले अभियानों को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं।

बीमारी से उबरने के बाद लोगों का धन्यवाद करने निकले रावत

हरीश रावत ने अपनी यात्रा का उद्देश्य बताते हुए कहा कि वह कई दिनों तक मेदांता अस्पताल की आईसीयू में रहे। गंभीर बीमारी से उबरने के बाद वह उत्तराखंड वापस लौटे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों और देवी-देवताओं के आशीर्वाद से उन्हें नया जीवन मिला और इसी के लिए वह लोगों के प्रति धन्यवाद और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए यात्रा पर निकले हैं।

रावत ने यह भी कहा कि ईडी और भाजपा ने उनके आत्मसम्मान को कुरेदा है और उन्हें इससे भी लड़ना है। उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।

7 अक्टूबर को दिल्ली जाएंगे हरीश रावत

कुमाऊं की यात्रा पूरी करने के बाद हरीश रावत मंगलवार को देहरादून लौटेंगे। इसके बाद 7 अक्टूबर को वह दिल्ली जाएंगे। दिल्ली में उनकी मुलाकात कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से प्रस्तावित है।

ऐसे में दिल्ली में होने वाली यह मुलाकात उत्तराखंड कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा, पार्टी नेतृत्व की आपत्तियों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत होने की संभावना है।

यात्रा से बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी सियासत की चर्चा

हरीश रावत की यात्रा के दौरान जिस तरह पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और समर्थक उनके साथ खड़े दिखाई दिए, उससे उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हालांकि, रावत स्वयं पार्टी में किसी गुटबाजी या बगावत की बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व व्यक्तिगत राजनीतिक अभियानों और पार्टी संगठन के बीच समन्वय को लेकर पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में हरीश रावत और पार्टी नेतृत्व के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

फिलहाल, कुमाऊं में हरीश रावत की यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब 7 अक्टूबर को दिल्ली में केसी वेणुगोपाल और कुमारी सैलजा के साथ होने वाली मुलाकात के बाद उत्तराखंड कांग्रेस की सियासत को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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