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रवांई घाटी में बैलों की जगह मशीनों से हो रही लाल धान की मंडाई, समय और मेहनत की बचत

ByParyavaran Vichar

Oct 17, 2026

पुरोला। उत्तराखंड की रवांई घाटी में पारंपरिक लाल धान की मंडाई का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है। पहले जहां बैलों की मदद से धान की मंडाई करने में कई दिन लग जाते थे, वहीं अब थ्रेशर मशीनों की सहायता से यह काम कुछ ही घंटों में पूरा हो रहा है। खेती में आए इस बदलाव से किसानों का समय और मेहनत बच रही है, लेकिन पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों को लेकर बुजुर्ग किसानों की चिंता भी सामने आ रही है।

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मशीनों से आसान हुई किसानों की राह

रवांई घाटी में युवा किसान अब लाल धान की मंडाई के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। युवा किसान महिदेव असवाल, अर्जुन सिंह और उपेंद्र रावत का कहना है कि थ्रेशर मशीनों के आने से मजदूरों पर निर्भरता कम हुई है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि किसानों की शारीरिक मेहनत भी घट रही है।

हालांकि, पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण खेतों तक बड़ी मशीनों को पहुंचाना आसान नहीं है। ऐसे में किसानों को पहाड़ के अनुकूल छोटी और सुविधाजनक मशीनों की जरूरत महसूस हो रही है।

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पारंपरिक तरीके को याद कर रहे बुजुर्ग किसान

बुजुर्ग किसानों का मानना है कि पारंपरिक खेती के तरीकों का अपना महत्व रहा है। किसान युद्धबीर सिंह, हरी सिंह और सुदामा प्रसाद के अनुसार, पहले लाल धान की मंडाई से पहले फसल को कुनका लगाकर करीब एक महीने तक रखा जाता था।

उनका कहना है कि इस पारंपरिक प्रक्रिया से धान के दाने मोटे और मजबूत होते थे तथा उनकी पौष्टिकता भी बेहतर रहती थी। आधुनिक मशीनों से काम भले ही जल्दी पूरा हो जाता है, लेकिन बुजुर्ग किसान खेती की पुरानी परंपराओं और उनसे जुड़े अनुभवों को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।

आधुनिक तकनीक के साथ परंपरा को बचाने की जरूरत

रवांई घाटी में खेती के तरीकों में तेजी से बदलाव हो रहा है। एक ओर आधुनिक मशीनें किसानों की मेहनत कम कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण की जरूरत भी महसूस की जा रही है।

ऐसे में जरूरी है कि किसानों को पहाड़ी खेतों के अनुकूल कृषि मशीनें उपलब्ध कराई जाएं और पारंपरिक खेती के उन तरीकों को भी सहेजा जाए, जो स्थानीय कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के बीच संतुलन बनाकर रवांई घाटी की खेती को अधिक सुविधाजनक और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

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