नौगांव (उत्तरकाशी), 22 अक्टूबर 2026। उत्तरकाशी जिले के नौगांव स्थित दौलतराम रवांल्टा राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) परिसर में शिक्षकों के लिए बनाए गए 16 आवासीय भवन पिछले करीब 15 वर्षों से खाली पड़े हैं। जर्जर हो चुके इन भवनों का अब तक ध्वस्तीकरण नहीं हो पाया है। ऐसे में विद्यालय में पढ़ने वाले करीब 500 छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
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हैरानी की बात यह है कि इन भवनों को वर्ष 2011 में निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया था, लेकिन डेढ़ दशक बीतने के बाद भी इन्हें हटाने या इनके स्थान पर नए भवन बनाने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
वर्ष 2011 में निष्प्रयोज्य घोषित हुए थे भवन
विद्यालय परिसर में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के लिए टाइप-टू और टाइप-थ्री श्रेणी के कुल 16 आवासीय भवन बनाए गए थे। वर्ष 2009 में छठे वेतनमान के लागू होने के बाद शिक्षकों ने इन आवासों को खाली कर दिया था।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
इसके बाद लोक निर्माण विभाग (लोनिवि), बड़कोट ने वर्ष 2011 में तकनीकी जांच के बाद इन भवनों को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया। तब से ये भवन खाली पड़े हैं और समय के साथ इनकी हालत लगातार खराब होती गई।
नए भवन बनाने का प्रस्ताव भी लंबित
वर्ष 2023-24 में विद्यालय का चयन क्लस्टर श्रेणी में होने के बाद पुराने आवासीय भवनों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर नए भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। हालांकि, अभी तक इस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
प्रस्ताव पर निर्णय नहीं होने के कारण पुराने भवनों की समस्या बनी हुई है। वहीं, विद्यालय परिसर में उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग भी नहीं हो पा रहा है।
विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता
विद्यालय परिसर में करीब 500 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। ऐसे में जर्जर और लंबे समय से खाली पड़े भवनों की मौजूदगी से विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
नगर के केंद्र में स्थित इस विद्यालय के पुराने भवनों को हटाकर उस स्थान का उपयोग नए शैक्षणिक भवनों या अन्य जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है। इससे विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
शासन की स्वीकृति का इंतजार
मुख्य शिक्षाधिकारी अमित कोटियाल के अनुसार, पुराने आवासीय भवनों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर नए भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। फिलहाल यह प्रस्ताव स्वीकृति के लिए लंबित है।

