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प्रदेश में सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा, किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

ByParyavaran Vichar

Jan 5, 2026

उत्तराखंड । उत्तराखंड  के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिकी मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है। औषधीय गुणों से भरपूर यह फल न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। प्रदेश सरकार बड़े पैमाने पर इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है।

पिथौरागढ़ जिले की दारमा और व्यास घाटी में वन विभाग द्वारा सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसकी जड़ें भूमि कटाव रोकने में सक्षम हैं, जो रेतीली और ढलानदार भूमि वाले हिमालयी क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी है। व्यास घाटी के गरव्यांग गांव में इसके उत्पादन की विशेष संभावनाएं बताई जा रही हैं।

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की वित्तीय सहायता से धारचूला विकासखंड की दारमा, व्यास और चौदास घाटियों में सीबकथोर्न का विस्तार किया जा रहा है। हालांकि अभी प्रदेश में इसका उत्पादन सीमित है, जबकि चीन इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

सीबकथोर्न का उपयोग खांसी, एलर्जी, त्वचा और आंखों के रोगों सहित कई बीमारियों में किया जाता है। इसमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके फल से तैयार जूस बाजार में 500 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है।

सरकार पर्वतीय जिलों में ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि (रीप) योजना के तहत सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है, ताकि पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और टिहरी जैसे जिलों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके।

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