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उत्तराखंड में सोलर रूफटॉप उपभोक्ताओं को झटका, सरप्लस बिजली अब 2 रुपये प्रति यूनिट

ByParyavaran Vichar

Mar 3, 2026

देहरादून। प्रदेश में छतों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। अब उनकी खपत से अधिक उत्पादन होने पर ग्रिड में जाने वाली अतिरिक्त बिजली केवल दो रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। यह नई व्यवस्था उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने लागू कर दी है।

यूपीसीएल के मुख्य अभियंता (वाणिज्यिक) एन.एस. बिष्ट की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के 20 अगस्त 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। आयोग ने वित्त वर्ष 2025-26 और उसके बाद स्थापित होने वाले सोलर पीवी प्लांट्स की बेंचमार्क कैपिटल कॉस्ट की समीक्षा के बाद यह दर निर्धारित की थी।

कैसे लागू होगा नया नियम

नई दर 20 अगस्त 2025 से प्रभावी मानी जाएगी। यह नियम नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत ग्रिड से जुड़े सभी सोलर प्लांट्स पर लागू होगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता की मासिक बिजली खपत 200 यूनिट है और सोलर पैनल से 300 यूनिट उत्पादन होता है, तो अतिरिक्त 100 यूनिट ग्रिड में जाएगी। अब इस 100 यूनिट का भुगतान दो रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से किया जाएगा।

स्पष्ट किया गया है कि उपभोक्ता को मिलने वाली सब्सिडी की राशि चाहे जो भी हो, सरप्लस बिजली की खरीद दर दो रुपये प्रति यूनिट ही रहेगी।

अधिकारियों को दिए गए निर्देश

यूपीसीएल मुख्यालय ने प्रदेश के सभी अधिशासी अभियंताओं को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सोलर ऊर्जा उत्पादकों की सरप्लस बिजली की बिलिंग नई दर के आधार पर सुनिश्चित करें।

प्रदेश में सोलर की स्थिति

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत उत्तराखंड में अब तक 70,183 सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 253.88 मेगावाट है। विभाग को 1,08,896 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1,08,779 की टेक्निकल फिजिबिलिटी रिपोर्ट स्वीकृत की जा चुकी है। 66,801 प्लांट्स का निरीक्षण भी अनुमोदित हो चुका है।

नई दरों के लागू होने से उन उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा, जिन्होंने बिजली बिल में बचत और अतिरिक्त आय के उद्देश्य से सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाए थे। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भविष्य में सोलर निवेश की गति को प्रभावित कर सकता है, हालांकि सरकार का तर्क है कि यह निर्णय लागत और बाजार स्थितियों की समीक्षा के बाद लिया गया है।

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