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उत्तराखंड में साल में दो बार होगी यूटीईटी परीक्षा, शिक्षकों को राहत देने की तैयारी

ByParyavaran Vichar

Jun 12, 2026

देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूटीईटी) को वर्ष में दो बार आयोजित करने की तैयारी कर रही है। यह कदम उन हजारों शिक्षकों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है, जिनकी नौकरी और पदोन्नति पर टीईटी अनिवार्यता के कारण संकट गहरा रहा है।

शिक्षा मंत्री Dhan Singh Rawat ने बताया कि केंद्र की Central Teacher Eligibility Test की तर्ज पर अब राज्य में भी वर्ष में दो बार यूटीईटी आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने के अन्य विकल्पों पर भी सरकार मंथन कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। सेवा में बने रहने और पदोन्नति प्राप्त करने के लिए उन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना होगा। लेकिन उत्तराखंड में यूटीईटी का आयोजन आमतौर पर वर्ष में केवल एक बार होने से शिक्षकों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

राज्य में विशेष रूप से 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त बीएड योग्यताधारी शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि वर्तमान यूटीईटी और सीटीईटी आवेदन प्रक्रिया में उनके लिए अलग से कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। इससे हजारों शिक्षकों के सामने पात्रता संबंधी चुनौती खड़ी हो गई है।

कुछ शिक्षक संगठनों ने सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष यूटीईटी आयोजित करने की मांग भी की है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि National Council for Teacher Education के नियमों में अलग से विभागीय टीईटी कराने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन कर शिक्षकों को शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।

उत्तराखंड में अंतिम यूटीईटी परीक्षा 27 सितंबर 2025 को आयोजित हुई थी। तब से अब तक नई परीक्षा आयोजित नहीं की गई है। शिक्षा सचिव Ravinath Raman ने बताया कि पात्र शिक्षकों की संख्या और उनकी मांगों का परीक्षण किया जा रहा है। वहीं, उत्तराखंड बोर्ड के सचिव Vinod Simlti के अनुसार शासन से निर्देश मिलने पर वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जा सकती है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार जल्द बैठक कर इस विषय पर अंतिम निर्णय लेगी, ताकि शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें और उनकी सेवा संबंधी चिंताओं का समाधान हो सके।

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