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हर आंख नम, हर दिल गर्वित: अग्निवीर रोहित सिंह रावत को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

ByParyavaran Vichar

Jun 13, 2026

टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक के मेंडू सिंधवाल गांव के रहने वाले 21 वर्षीय अग्निवीर जवान Rohit Singh Rawat का शुक्रवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में एलओसी पर गश्त के दौरान हुई घटना में उनका निधन हो गया था। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने नम आंखों से वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

एक साल पहले ही सेना में हुए थे भर्ती

रोहित सिंह रावत एक वर्ष पहले अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। जनवरी 2026 में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी तैनाती जम्मू क्षेत्र में हुई थी। बताया गया कि 10 जून को गश्त के दौरान उन्हें उनकी सर्विस राइफल से गोली लग गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उन्होंने वीरगति प्राप्त की।

हालांकि गोली लगने की परिस्थितियां अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और सेना द्वारा मामले की जांच की जा रही है।

गांव पहुंचते ही छा गया मातम

11 जून की रात जब रोहित का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन अपने बेटे से लिपटकर रोते-बिलखते रहे। माता-पिता, छोटे भाई और दादी की स्थिति देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

शुक्रवार को बिनपुला भिलंगना घाट पर रोहित का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। अंतिम यात्रा के दौरान “भारत माता की जय” और “अमर बलिदानी रोहित रावत अमर रहें” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

स्थानीय लोगों ने पुष्प अर्पित कर वीर जवान को श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को राष्ट्र के लिए सर्वोच्च समर्पण बताया।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि

अंतिम संस्कार में Shakti Lal Shah, Bhimlal Arya, Anand Bisht सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

सभी ने वीर जवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

रोहित की याद में बनेगा स्मृति द्वार

घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह ने घोषणा की कि वीर जवान रोहित सिंह रावत की स्मृति में शीघ्र ही एक स्मृति द्वार का निर्माण कराया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को याद रख सकें।

पूरे क्षेत्र में शोक और गर्व का माहौल

रोहित के पिता Surendra Singh, माता Bhima Devi, छोटे भाई मोहित और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव और आसपास के क्षेत्रों से लोग लगातार परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।

21 वर्ष की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले रोहित सिंह रावत की शहादत ने पूरे उत्तराखंड को गर्व और शोक दोनों से भर दिया है। उनका साहस और समर्पण हमेशा याद किया जाएगा।

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