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ऊर्जा निगमों के टैरिफ प्रस्तावों में खामियां, नियामक आयोग ने मांगा जवाब

ByParyavaran Vichar

Dec 16, 2025

देहरादून:
प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगम—उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल), उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) और पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल)—की ओर से नियामक आयोग को भेजे गए टैरिफ प्रस्तावों में कई कमियां सामने आई हैं। इन खामियों को लेकर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने तीनों निगमों को पत्र भेजकर बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इस वर्ष ऊर्जा निगमों ने कुल मिलाकर बिजली दरों में लगभग 18.50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यूपीसीएल ने अपने प्रस्ताव में 16.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी का सुझाव दिया है, जबकि पिटकुल की ओर से करीब तीन प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, पहली बार यूजेवीएनएल ने माइनस 1.2 प्रतिशत का ऋणात्मक टैरिफ प्रस्ताव भेजा है, जिसे लेकर नियामक आयोग के अधिकारी भी मंथन कर रहे हैं।

आयोग के अनुसार यूजेवीएनएल और पिटकुल ने 30 नवंबर से पहले ही अपने-अपने टैरिफ प्रस्ताव नियत समय पर प्रस्तुत कर दिए थे, जबकि यूपीसीएल ने करीब नौ दिसंबर को अपना प्रस्ताव सौंपा। सभी प्रस्तावों का गहन अध्ययन करने के बाद नियामक आयोग ने कुछ तकनीकी और वित्तीय बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की हैं। इन्हीं बिंदुओं पर अब तीनों ऊर्जा निगमों से 17 दिसंबर तक जवाब मांगा गया है।

नियामक आयोग के अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी तथ्यों और आंकड़ों पर स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक याचिकाएं विधिवत दाखिल नहीं की जाएंगी। जानकारी पूरी होने के बाद आयोग फरवरी माह में इन टैरिफ प्रस्तावों पर जनसुनवाई आयोजित करेगा, जिसमें उपभोक्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इसके बाद सभी पहलुओं का विश्लेषण कर नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अंतिम टैरिफ जारी किया जाएगा।

आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई बिजली दरें एक अप्रैल से लागू होंगी। खास तौर पर यूजेवीएनएल के ऋणात्मक टैरिफ प्रस्ताव को लेकर आयोग के स्तर पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है, क्योंकि इसका सीधा अर्थ यह है कि निगम को किसी भी तरह की दर बढ़ोतरी नहीं मिलेगी। आने वाले दिनों में दिए जाने वाले जवाबों और जनसुनवाई के आधार पर ही यह तय होगा कि उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का वास्तविक बोझ कितना पड़ेगा।

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