उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के सितारगंज में प्रसूता काजल कौर (24) की मृत्यु के मामले में पुलिस ने अदालत के आदेश पर तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें उप जिला अस्पताल में तैनात डॉ. नेहा सिद्दीकी, आस्था अस्पताल के प्रबंधक और अस्पताल में तैनात निजी चिकित्सक शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, काजल कौर को 21 जुलाई 2025 को प्रसव पीड़ा होने पर स्थानीय उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉ. नेहा सिद्दीकी ने सीमित सुविधाओं का हवाला देते हुए उन्हें आस्था अस्पताल में रेफर किया। वहां 26 हजार रुपये में ऑपरेशन किया गया, जबकि जांच और दवाओं के लिए 7 हजार रुपये अतिरिक्त लिए गए।
डिलीवरी के बाद माँ और शिशु की हालत बिगड़ती चली गई। 22 जुलाई को उन्हें दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में 24 जुलाई को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल भेजा गया। वहां संक्रमण और नसों में ब्लॉकेज का पता चला। अंततः 25 जुलाई को काजल को देहरादून के स्वामी हिमालयन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 3 अगस्त को उनका निधन हो गया।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह पुष्टि हुई कि डॉक्टरों और आस्था अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही बरती। जटिल डिलीवरी के बावजूद मरीज को उच्च केंद्र में रेफर नहीं किया गया और सरकारी नियमों की अवहेलना करते हुए निजी अस्पताल में ऑपरेशन किया गया।
घटना के बाद आस्था अस्पताल का नैदानिक पंजीकरण अस्थायी रूप से रद्द कर 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। डॉ. नेहा सिद्दीकी से संबंधित किसी भी कार्रवाई का अधिकार शासन स्तर पर है। मामले की विवेचना जारी है और उच्चाधिकारियों को FIR की जानकारी दे दी गई है।
